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Monday, 11 June 2012

नसीब (Destiny)


मैं तुझसे कितनी दूर हूँ,
और तू मुझसे दूर होकर,
मेरे कितने करीब,
हाय कैसा ये मेरा 'नसीब'.

जब तुझे देखा था पहली बार,
हो गया था मुझे तुझसे प्यार,
मन ही मन मैं तुझसे करता रहा प्यार,
कर न सका मैं तुझसे इकरार,
मैं हो न सका तेरे करीब,
हाय कैसा ये मेरा 'नसीब'.

एक दिन आया मेरे दिल में ख्याल,
शायद तुझे भी है मेरे प्यार का एहसास,
पर तुने मेरे कहने का किया इंतज़ार,
करते रहे हम एक दुसरे से प्यार,
लम्हा था वो कैसा अजीब,
हाय कैसा ये मेरा 'नसीब'.

एक दिन चली गयी तू मुझसे दूर,
रह गया मैं तन्हा और अकेला,
अपने को गम में धकेला,
तेरे प्यार में टूटा मैं,
सब कुछ खोकर हो गया गरीब,
हाय कैसा ये मेरा 'नसीब'!





Saturday, 26 May 2012

लहरें

उसने जो आँखें मिलाई,
वो दिल को घायल कर गयी.
और जब पलकें झुकाई,
तो मुझको पागल कर गयी.
जब बातों का सिलसिला उनसे चला,
तो लगा कि मेरी मंजिल है यही.
जब साथ हम होते थे,
तो वक़्त जैसे थम सा जाता था.
कभी बैठे होते हम पेड़ कि छाओं में,
तो कभी सागर किनारे.
कभी उसका आँचल मेरे चहेरे पर लहराता,
तो कभी साहिल कि लहरें पैरों को छू जाती.
और ऐसा लगता शायद यही जन्नत है,
लेकिन न जाने फिर ऐसा क्या हुआ!
वक़्त ने ऐसी करवट ली,
आज भी मैं बैठा हूँ वहीँ,
सागर के उसी छोर पर,
उसके इंतज़ार में,
पर आज ना उसका आँचल है,
और कुदरत भी शायद हम से खफा है,
इसलिए ना ही साहिल कि लहरें....!!!